पत्नी को गिफ्ट करने के लिए बनवा दिया एक और ‘ताजमहल’ जानिए कहां बना है भारत का दूसरा ताजमहल

मध्यप्रदेश के बुरहानपुर के स्कूल के संचालक आनंद प्रकाश चौकसे ने अपना घर बिल्कुल ताजमहल की तरह बनवाया है। 3 साल में बनकर तैयार हुए 4 बेडरूम वाले इस घर को चौकसे ने अपने पत्नी मंजूषा को तोहफे में दिया है। इसमें एक बड़ा हॉल, 2 बेडरूम नीचे और 2 बेडरूम ऊपर हैं। इसके अलावा किचन, लाइब्रेरी और मेडिटेशन रूम भी है।

घर को इंडियन कंस्ट्रक्टिंग अल्ट्राटेक आउट स्टैंडिंग स्ट्रक्चर ऑफ मध्यप्रदेश का अवॉर्ड मिल चुका है।

आनंद ने सिर्फ घर का बाहरी डिजाइन ही शाही नहीं बनवाया है, बल्कि घर के इंटीरियर को भी रॉयल लुक दिया गया है।
आनंद ने सिर्फ घर का बाहरी डिजाइन ही शाही नहीं बनवाया है, बल्कि घर के इंटीरियर को भी रॉयल लुक दिया गया है।

आगरा में बने असली ताजमहल को मुगल शासक शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज के लिए बनवाया था। मुमताज की मौत 14वें प्रसव के दौरान बुरहानपुर के ही एक महल में हुई थी। 6 महीने तक मुमताज का पार्थिव शरीर बुरहानपुर के आहुखाना में सुरक्षित रखा गया था। शाहजहां पहले बुरहानपुर से गुजरने वाली ताप्ती नदी के किनारे ताजमहल बनवाना चाहते थे, लेकिन किन्हीं कारणों से उन्हें बुरहानपुर की जगह आगरा में बनवाना पड़ा।

बुरहानपुर के स्कूल के संचालक आनंद प्रकाश चौकसे का घर रात में दूर से ही अलग नजर आता है।
बुरहानपुर के स्कूल के संचालक आनंद प्रकाश चौकसे का घर रात में दूर से ही अलग नजर आता है।

चौकसे बताते हैं कि उनके मन में इस बात की कसक थी कि बुरहानपुर में ताजमहल क्यों नहीं बन सका। इसलिए उन्होंने अपनी पत्नी को शाहजहां की तरह ताजमहल गिफ्ट करने के बारे में ठान लिया। इस घर का बनाने में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा, लेकिन आनंद के अटूट विश्वास के कारण ताजमहल जैसा मकान बनाने में कामयाबी मिल गई।

चौकसे के घर के आसपास फूलों के ढेर सारे पेड़ हैं। नजदीक में खुली जगह भी है, जिससे घर की खूबसूरती में चार चांद लग जाते हैं।
चौकसे के घर के आसपास फूलों के ढेर सारे पेड़ हैं। नजदीक में खुली जगह भी है, जिससे घर की खूबसूरती में चार चांद लग जाते हैं।

आगरा जाकर पहले ताज महल देखा, फिर इंजीनियरों से कहा वैसा ही घर बनाएं
ताजमहल जैसा घर बनाने वाले कंसल्टिंग इंजीनियर प्रवीण चौकसे ने बताया आनंद चौकसे ने उन्हें ताजमहल जैसा मकान बनाने को कहा था। यह मुश्किल काम था। आनंद और उनकी पत्नी ताजमहल देखने आगरा गए थे। लौटने के बाद इंजीनियरों से ताजमहल जैसा ही घर बनाने को कहा। इसके बाद इंजीनियर प्रवीण चौकसे ने भी आगरा जाकर ताजमहल देखा।

घर के इंटीरियर में ज्यादातर वर्क वाइट मार्बल से किया गया है। सीढ़ियों से लेकर खिड़कियों तक सभी डिजाइन बेहद बारीकी से बनाए गए हैं।
घर के इंटीरियर में ज्यादातर वर्क वाइट मार्बल से किया गया है। सीढ़ियों से लेकर खिड़कियों तक सभी डिजाइन बेहद बारीकी से बनाए गए हैं।

आनंद चौकसे औरंगाबाद के दौलताबाद में ताजमहल की तरह बने मकबरे को भी देखा था। पहले आनंद ने इंजीनियरों को 80 फीट ऊंचा यूनिक घर बनाने के लिए कहा था, लेकिन अनुमति न मिलने के कारण उन्होंने ताजमहल जैसा घर बनाने का असाइनमेंट दिया। इंजीनियरों ने कहा कि इस्लामी मायथॉलॉजी के अनुसार ताजमहल मकबरा है। इन सब तर्कों को दरकिनार करते हुए आनंद चौकसे ने ताजमहल जैसा ही घर बनाने को कहा।

ताजमहल जैसा घर तैयार करने में इंजीनियरों को 3 साल का वक्त लगा, इसे तैयर करने के लिए ताजमहल की 3डी इमेज का सहारा लिया गया।
ताजमहल जैसा घर तैयार करने में इंजीनियरों को 3 साल का वक्त लगा, इसे तैयर करने के लिए ताजमहल की 3डी इमेज का सहारा लिया गया।

इंजीनियरों ने चैलेंज के तौर पर लिया
इंजीनियरों ने इंटरनेट के जरिए ताजमहल की 3डी इमेज निकाली। फिर इसे बनाना शुरू किया। 3 साल में घर बनकर तैयार हुआ। असली ताजमहल की तुलना में यह घर एक तिहाई क्षेत्रफल में फैला है। इंजीनियर प्रवीण चौकसे के मुताबिक, इस घर का क्षेत्रफल मीनार सहित 90 बाय 90 का है। बेसिक स्ट्रक्चर 60 बाय 60 का है। गुंबद 29 फीट ऊंची रखी गई है।

इस घर को इंडियन कंस्ट्रक्टिंग अल्ट्राटेक आउट स्टैंडिंग स्ट्रक्चर ऑफ मध्यप्रदेश का अवॉर्ड मिल चुका है।
इस घर को इंडियन कंस्ट्रक्टिंग अल्ट्राटेक आउट स्टैंडिंग स्ट्रक्चर ऑफ मध्यप्रदेश का अवॉर्ड मिल चुका है।
घर का ज्यादातर निर्माण स्थानीय मिस्रियों से कराया गया है। घर के अंदर की गई नक्काशी के लिए बंगाल और इंदौर के कलाकारों से मदद ली गई है।
घर का ज्यादातर निर्माण स्थानीय मिस्रियों से कराया गया है। घर के अंदर की गई नक्काशी के लिए बंगाल और इंदौर के कलाकारों से मदद ली गई है।
घर की फ्लोरिंग राजस्थान के मकराना के कारीगरों से कराई गई है। बाकी काम आगरा के कारीगरों से कराया गया है। फर्नीचर का काम सूरत और मुंबई के कारीगरों ने किया।
घर की फ्लोरिंग राजस्थान के मकराना के कारीगरों से कराई गई है। बाकी काम आगरा के कारीगरों से कराया गया है। फर्नीचर का काम सूरत और मुंबई के कारीगरों ने किया।